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Thursday, June 27, 2013

जेठ-आषाढ़


जेठ की तपती दुपहरी थी
गरम साँसों के बीच
लू भी जी जलाती थी.
तब...एकाएक
उसने कहा कि
वो दूर जाने वाला है
कुछ दिन का विरह
बीच में आने वाला है .

मैंने कहा,बता कर जाना
उसका कहना कि
मुझसे कहे बिना क्या
संभव होगा उसका जा पाना ?

वो गया ...
जब चला गया...
दुनिया ने बताया
जब लौटा ..तब भी....
जग ने ही खबर दी
उसकी वापसी की
बताने की ज़रूरत उसे
महसूस ही नहीं हुई .
उसकी ज़िंदगी वैसे ही
मेरे बिन भी चलती रही .

बड़े दिन बाद
एक दिन बात हुई
शिकवे हुए शिकायत हुई
पर,
उसकी आवाज़ की ठंडक
कलेजे के खून को जमा गयी
आषाढ़ के महीने में भी
रिश्तों में से गर्माहट
न जाने कहाँ गयी .

Monday, November 26, 2012

सर्दी



गुलाबी सर्दियों की
ये सर्द सुबहें और रातें
साथ ले कर आती हैं
कितनी सारी यादें .

तेरी यादों की गर्माहट
जो धूप बन सहलाती है
वही शाम होते होते
मेरे गले लग कर
रोती हैं रात भर
और भोर होते ही
ओस लुटाती हैं.

Sunday, September 9, 2012

न जाने कहाँ गयी ....




जेठ की तपती दुपहरी
गरम साँसों की आवाजाही
लू भी जब जी जला रही
तब...एकाएक
उसने कहा कि
वो दूर जाने वाला है
कुछ दिन का विरह
बीच में आने वाला है .

मैंने कहा,बता कर जाना
उसका कहना कि
मुझसे कहे बिना क्या
संभव होगा उसका जा पाना ?

वो गया ...
जब चला गया...
दुनिया ने बताया .
जब लौटा ..तब भी....
जग ने ही खबर दी,
उसकी वापसी की .
बताने की ज़रूरत उसे
महसूस ही नहीं हुई .
उसकी ज़िंदगी वैसे ही
मेरे बिन भी चलती रही .

बड़े दिन बाद
एक दिन बात हुई
शिकवे हुए शिकायत हुई
पर,
उसकी आवाज़ की ठंडक
कलेजे के खून को जमा गयी
आषाढ़ के महीने में भी
रिश्तों में से गर्माहट
न जाने कहाँ गयी .

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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