एक पागल है ..
सारे शहर में घूम घूम के
हरसिंगार के झरे फूल और गिरी पत्तियां
इकट्ठी करता है .
सुना है...
वक्त का है मारा
फ़ौजी है पुराना
इन फूल पत्तियों में
उसे...
अपना तिरंगा नज़र आता है .
जिससे हर शख्स बेखबर नज़र आता है .
अपने देश की स्थिति दिखायी देती है .
बात-बात पे उसकी आँख भर आती है .
देश के लिए कुछ करने..देश को कुछ दे पाने का पागलपन हम पे भी हावी हो जाए .
आज़ादी दिवस आप सभी को मुबारक हो !!

