बहुत कडवी है यह ज़िन्दगी
उतरती है सीने में
जला देती है जिगर.
आँखों के पानी में
घोले बिना ,
इसे पीना ...जीना
लगभग नामुमकिन ।
ज़िंदगी की इस तल्ख़ी को
थोड़ा कम कर लें
आओ, उससे बात कर लें
थोड़ा सा नशा कर लें
थोड़ा सा जी लें
थोड़ा सा मर लें
उससे अपने रिश्ते को
ज़रा कसौटी पर कस लें
