ज़िन्दगी एक किताब सी है,जिसमें ढेरों किस्से-कहानियां हैं ............. इस किताब के कुछ पन्ने आंसुओं से भीगे हैं तो कुछ में,ख़ुशी मुस्कुराती है. ............प्यार है,गुस्सा है ,रूठना-मनाना है ,सुख-दुःख हैं,ख्वाब हैं,हकीकत भी है ...............हम सबके जीवन की किताब के पन्नों पर लिखी कुछ अनछुई इबारतों को पढने और अनकहे पहलुओं को समझने की एक कोशिश है ...............ज़िन्दगीनामा
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Thursday, November 3, 2011
कौन किसका करे त्याग
कहाँ चले गए हो?
क्यूँ चले गए हो?
मत जाया करो...
कुछ अच्छा नहीं लगता .
किसी से क्या...
तुमसे भी, कुछ कह नहीं पाती
अंदर ही अंदर सब सहती रहती हूँ.
न जाने मैं कितनी मौतें मरती हूँ .
तुमसे कुछ कहो,तो तुम अनसुना कर जाते हो .
बात बात पे...मोह त्याग का उपदेश झाड चले जाते हो
मैं पूछती हूँ ..
कि
मोह का,प्रेम का,लगाव का , स्नेह का,अनुराग का त्याग ही क्यूँ किया जाए
तुम क्यूँ नहीं कर देते ..
अपने अहम का ,दंभ का ,उदासीनता का ,निर्मोह्पन का ,वीतराग का त्याग ...
मेरे लिए...
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