प्यार करते हो तुम,मुझसे
तुमने अनगिन बार ये
दोहराया है .
मुझमें और तुममें कोई अंतर नहीं
बार-बार यह समझाया है.
पूर्णता के साथ भूलना कैसे संभव है ?
भूलने के लिए भी तो याद करना ज़रूरी है .
कहो,कैसे भूला जाए उस को
जिसने मुझे संपूर्ण किया .
अपूर्ण थी मैं ...
तुमसे मिलके पूर्ण हुई मैं ..
इसलिए ,
विस्मरण जैसा कुछ भी
प्रेम में संभव ही नहीं
तुम मेरा अस्तित्व
मैं तेरा वजूद
इसलिए ....अकेला बिखरता नहीं कोई
जब भी टूटेंगे ...बिखेरेंगे
हम साथ साथ होंगे .
