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Saturday, December 15, 2012

साथ-साथ



प्यार करते हो तुम,मुझसे
तुमने अनगिन बार ये
दोहराया है .
मुझमें और तुममें कोई अंतर नहीं
बार-बार यह समझाया है.

पूर्णता के साथ भूलना कैसे संभव है ?
भूलने के लिए भी तो याद करना ज़रूरी है .
कहो,कैसे भूला जाए उस को
जिसने मुझे संपूर्ण किया .

अपूर्ण थी मैं ...
तुमसे मिलके पूर्ण हुई मैं ..
इसलिए ,
विस्मरण जैसा कुछ भी
प्रेम में संभव ही नहीं
तुम मेरा अस्तित्व
मैं तेरा वजूद
इसलिए ....अकेला बिखरता नहीं कोई


जब भी टूटेंगे ...बिखेरेंगे
हम साथ साथ होंगे .

Wednesday, November 30, 2011

विस्मरण ही मुश्किल है ...




मेरी ज़िंदगी बदलने को
वो शख्स आया था .
जीना सिखाया...उसने .
देने का सुख ,
बेहतर है लेने से
मुझे बताया ...उसने.

आज,
जब वो गया कह कर
भूल जाना मुझे....
कोशिश करना दिल से,
कि भूल पाओ मुझे
तो.....
समझा गया
कि
सरल बहुत है..याद करना
विस्मरण ही मुश्किल है .

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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