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Saturday, June 16, 2012

शायद ...



सही कहा तुमने ...शायद
किसी चीज़ का कोई भरोसा नहीं है
और फिर इस मुए चाँद का तो कतई नहीं
रोज तो घटता बढ़ता रहता है .

चाँद को तुम टांगना
हाथ से गोल कर .
मुझे जो जैसा है
वैसा पसंद है .
मुझे बदलाव मंजूर नहीं
काटना छांटना बस का नहीं .

किस्मत के सितारे
होते गर साथ हमारे
तो यह हाल ही होता क्यूँ
मैं उसको ,वो मुझको
खोता ही क्यूँ ????

जो मेरा है,हर हाल मिलेगा मुझे
किसी सर्च लाईट की ज़रूरत नहीं
सितारों पे यकीन की ज़रूरत नहीं
बस अपने प्यार पे यकीन है,मुझे .

दाग और चोट मिलें तो मिल जाएँ
उनसे कोई गुरेज नहीं
बस इतनी सी अरज है
कि तुम भी मिल जाओ ,कभी

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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