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Thursday, September 27, 2012

सिगरेट



तुम इतने संजीदा क्यूँ हो जाते हो
जब भी मैं यह कहती हूँ
सिगरेट पीने से उम्र कम हो जाती है
छोड़ क्यूँ नहीं देते इसे पीना .
मर जाओगे तो पता है
सांसें भले लेती रहूँ
पर मैं जीते हुए भी
रो-रो मर जाउंगी.

पता है ,तुम मर गए अगर
तो तुम्हारी तस्वीर को नहीं टांगूंगी दीवार पे...
न उसपे कोई माला चढाऊंगी
न ही अगरबत्ती जलाऊँगी ,उसके आगे.
अपनी माला के लोकेट में
पहन लूंगी,तुम्हारी तस्वीर
आस पास रहोगे मेरे दिल के.
अगरबत्ती न जला के
मैं ही सिगरेट पीना शुरू कर दूंगी
जिससे तुम तक पहुँच सके
सिगरेट का धुंआ...
और मैं भी उस धुंए में रहते रहते
जल्दी मर जाऊं
आकर के तुमसे मिल पाऊं.

Monday, July 16, 2012

नज़र बट्टू



तेरे वादों से गुंथा
एक धागा है
जिसमें...
मैंने तेरे इंतज़ार के मनके पिरोये हैं.
प्रेम की एक माला तैयार की है.
पहने रहती हूँ ,उसे ....सदा.

उसमें एक लोकेट है
जो मेरे दिल के करीब रहता है
तेरी तस्वीर रख छोडी है,उसमें .
मेरे नज़र बट्टू हो तुम
अब किसी की नज़र
मुझपे असर नहीं करती.

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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