ज़िन्दगी एक किताब सी है,जिसमें ढेरों किस्से-कहानियां हैं ............. इस किताब के कुछ पन्ने आंसुओं से भीगे हैं तो कुछ में,ख़ुशी मुस्कुराती है. ............प्यार है,गुस्सा है ,रूठना-मनाना है ,सुख-दुःख हैं,ख्वाब हैं,हकीकत भी है ...............हम सबके जीवन की किताब के पन्नों पर लिखी कुछ अनछुई इबारतों को पढने और अनकहे पहलुओं को समझने की एक कोशिश है ...............ज़िन्दगीनामा
Showing posts with label महफ़िल. Show all posts
Showing posts with label महफ़िल. Show all posts
Wednesday, December 4, 2013
कहाँ तक तुम्हें
देखो कहाँ तक तुम्हें लेकर ये झूठ जायेंगे
कभी न कभी तो पाप के ये घड़े फूट जायेंगे
पता लग जायेगी अभी इन लोगों की हक़ीक़त
जैसे ही अन्दर शराबों के चंद घूँट जायेंगे
वाकिफ़ हूँ इससे कि मैं झूठ बोल नहीं सकता
और जो मैंने सच बोला तो अपने रूठ जायेंगे
वो जो बैठे हैं इस महफ़िल में नज़रें झुकाए
देखना है कि वो मेरा क्या क्या लूट जायेंगे
नहीं जानता था तुम्हारे मायने ज़िंदगी में
जाना अब जब लगा कि सहारे ये छूट जायेंगे
Saturday, July 28, 2012
मज़ेदार..

मज़ेदार होता है न प्यार....
पता है....
पहले मैं अकेले तनहा हुआ करती थी
जबसे मोहब्बत हुई है मुझको
तुम्हारा प्यार, एहसास होता है पास
और इसके साथ होने पर भी
मैं अकेले ही अकेले हुई जाती हूँ.
अजीब है न प्रेम ?!
समझ नहीं आता इसका सर पैर कुछ
अच्छे खासे इंसान को एकलखुरा बना देता है .
अब तन्हाई की आदत हो गयी है
महफ़िल में मन नहीं रमता
कुछ भी तेरे बिन
न जाने क्यूँ अच्छा नहीं लगता .
Subscribe to:
Posts (Atom)
