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Monday, August 10, 2015

दोराहे पे नहीं


मैं बदली थोड़ा
कुछ तुम बदले
हालातों ने फिर
साथ करवट बदले
वक़्त तो यूँ भी
खातिर किसी की
रुका नहीं है कभी
पते की बात बस इतनी सी
एक बार प्यार हो जाए जो
तो वो कभी जाता कहीं नहीं
आज भी तुम हो वहीँ
दिल के कोने में किसी
पर हाँ..अब हो
हक़ीक़त से दूर बड़े
बस ख़्वाबों और यादों में
महसूस होती रहती
है तुम्हारी मौजूदगी

शुक्रिया दोस्त तुम्हारा
जो ज़िन्दगी अब किसी दोराहे पे नहीं

Thursday, September 26, 2013

......नहीं है



तमाम उमर मुहब्बत का नशा उतरता नहीं है
मुश्किल बस इतनी कि आसानी से चढता नहीं है

दो चार सच्चे यार दोस्त जिसके आस पास रहें
कितना भी बुरा वक्त आये वो बिखरता नहीं है

हमारे रास्ते जुदा हुए बरसों बरस गुज़र गए
बाक़ी रह गया है कुछ जो कभी ढलता नहीं है

दरक जाता है बरसों का यकीं इक झूठी बात पे
इस शज़र की खासियत दोबारा पनपता नहीं है

गैरों की कमियां गिनाते हुए जुबां नहीं थकती
अपना ऐब पर क्यूँ आँखों में खटकता नहीं है

अपनी काबिलियत का वो इश्तिहार नहीं करता
खरी बात ये भरा जो घड़ा वो छलकता नहीं है

मिल जाएँ हम या हो जाएँ एक दूजे से जुदा
प्यार होता है तो रहता है कभी मरता नहीं है

हादसे के बाद वापस ढर्रे पे आ गयी है ज़िंदगी
बस बच्ची का बचपन अब ढूंढे मिलता नहीं है

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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