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Thursday, December 5, 2013

इश्क़ की खुमारी


हल्का हल्का सा एक नशा तारी है
और कुछ नहीं ये इश्क़ की खुमारी है

कल क्या होगा इसका भरोसा नहीं
न जाने क्यूँ उम्र भर की तैयारी है

खुश ना होना तुम उसको गिरता देख
आज उसकी तो कल तुम्हारी बारी है

ज़िंदगी है हर तरह के जायके वाली
मीठी कभी कड़वी कभी खारी है

शक़ की निगाहों को खुद से दूर रखना
वाकिफ हो यह लाइलाज बीमारी है

तेरा प्यार हो या कि तेरी नाराजगी
मुझे तेरी हर अदा जां से प्यारी है

तुम अपना हाथ मेरे हाथ में दे दो
ज़िंदगी की हरेक शै फिर हमारी है

Friday, September 7, 2012

सच में....



प्रेम का इतिहास,जुगराफिया
फिजिक्स,केमिस्ट्री
कुछ नहीं पता.
जानती हूँ बस इतना
कि जब वो नहीं होता
तो सब बेस्वाद हो जाता है.

किसी काम में मन नहीं रुचता
कुछ भी अच्छा नहीं लगता
हरेक लम्हा भारी
सब ओर एक शख्स तारी .
जिसने खुद कभी प्रेम प्याला चखा नहीं
वो इसके तिलिस्म को जान सकता नहीं
जादू है इसमें कुछ जो नज़र आता नहीं
किताबों में पढ़ने से इसका सबक आता नहीं

सच में .....
प्रेम ,आस्वाद है.....
जिसे खुद चखे बिना नहीं जाना जा सकता .

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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