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Saturday, January 14, 2012

पीला रंग


वो कहता था
बसंती पीला
चटक रंग
जब तुम ओढोगी...
पहनोगी यह रंग
तो कितनी सुन्दर लगोगी .
हाथ पीले होंगे
तो हल्दी भी इतराएगी
तेरे हाथों पे लग के .

मैं सोचती हूँ
कि मुझे ऐसे देखकर
उसके पीले पत्ते से चेहरे को
मैं कैसे निहार पाउंगी?
उसकी ज़र्द हुई बेनूर आँखों को
मैं कैसे देख पाउंगी?
बसंती बयार सा प्यार उसका
कहाँ,कैसे छुपायेगा वो ?

बोलो न.....?
एक ही रंग
दो लोगों पर
अलग -अलग सा...
क्यूँ लगता है ?
अलग-अलग कैसे दिखता है ?

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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