ज़िन्दगी एक किताब सी है,जिसमें ढेरों किस्से-कहानियां हैं ............. इस किताब के कुछ पन्ने आंसुओं से भीगे हैं तो कुछ में,ख़ुशी मुस्कुराती है. ............प्यार है,गुस्सा है ,रूठना-मनाना है ,सुख-दुःख हैं,ख्वाब हैं,हकीकत भी है ...............हम सबके जीवन की किताब के पन्नों पर लिखी कुछ अनछुई इबारतों को पढने और अनकहे पहलुओं को समझने की एक कोशिश है ...............ज़िन्दगीनामा
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Saturday, January 14, 2012
पीला रंग
वो कहता था
बसंती पीला
चटक रंग
जब तुम ओढोगी...
पहनोगी यह रंग
तो कितनी सुन्दर लगोगी .
हाथ पीले होंगे
तो हल्दी भी इतराएगी
तेरे हाथों पे लग के .
मैं सोचती हूँ
कि मुझे ऐसे देखकर
उसके पीले पत्ते से चेहरे को
मैं कैसे निहार पाउंगी?
उसकी ज़र्द हुई बेनूर आँखों को
मैं कैसे देख पाउंगी?
बसंती बयार सा प्यार उसका
कहाँ,कैसे छुपायेगा वो ?
बोलो न.....?
एक ही रंग
दो लोगों पर
अलग -अलग सा...
क्यूँ लगता है ?
अलग-अलग कैसे दिखता है ?
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