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Wednesday, October 12, 2011

कौन हूँ मैं??????




कौन हूँ मैं?
कितनी बार यह सवाल खुद से करती हूँ ...
फिर तुम्हारी बातों में से ही ..
एक उत्तर खोज लेती हूँ
क्यूंकि ,
अधिकतर ,मैं वही सोचती हूँ
जो सब चाहते हैं कि मैं सोचूं .
मेरा मन...??
वो क्या है ...
सबके मन की करते -करते
भूल चुकी हूँ कि मेरे पास भी
अपना एक मन है .
मेरा दिमाग ???
औरतों के पास भी दिमाग होता है क्या???
कभी इस्तेमाल करती और कोई सराहता
तो ही उसे जानती ,पहचानती न !
मेरी भावनाएं????
उनकी मुझे क्या ज़रूरत
मेरा तो धर्म है ...
सबकी खुशी में खुश होना और दुःख में दुखी .
मेरी इच्छाएं?????
मैं मजाक कर रही हूँ क्या?????
मैं और तुम अलग हैं क्या
जो तुम चाहो
बस वही होनी चाहिए मेरी इच्छा .


न मन अपना,न भावनाएं अपनी
न दिमाग अपना ,न इच्छाएं अपनी
न सोच अपनी,न खुशी- गम अपने
अच्छा ,तुम ही कहो न?!
मैं सजीव हूँ या निर्जीव ....??????

(प्रकाशित)

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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