ज़िन्दगी एक किताब सी है,जिसमें ढेरों किस्से-कहानियां हैं ............. इस किताब के कुछ पन्ने आंसुओं से भीगे हैं तो कुछ में,ख़ुशी मुस्कुराती है. ............प्यार है,गुस्सा है ,रूठना-मनाना है ,सुख-दुःख हैं,ख्वाब हैं,हकीकत भी है ...............हम सबके जीवन की किताब के पन्नों पर लिखी कुछ अनछुई इबारतों को पढने और अनकहे पहलुओं को समझने की एक कोशिश है ...............ज़िन्दगीनामा
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Wednesday, December 28, 2011
कुहासे की चादर
कुहासे की इस चादर को...
पर्दा बना लें ,क्या?
जी भर के इन गुलाबी सर्दियों का
मज़ा ले लें,क्या ?
देखो,न
ईश्वर ने भी तुम्हारी सुन ली
तुम्हारी इस हिचकिचाहट
कि कहीं कोई देख न ले ..
..से तुम्हें मुक्ति दे दी
आओ,ना मेरे आगोश में
सच...इस कोहरे को काटने की कैंची
किसी के पास नहीं है ..
जब तक सूरज नहीं आता
भगवान ने ,हमें,
प्यार करने का वक्त दे रखा है
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