ज़िन्दगी एक किताब सी है,जिसमें ढेरों किस्से-कहानियां हैं ............. इस किताब के कुछ पन्ने आंसुओं से भीगे हैं तो कुछ में,ख़ुशी मुस्कुराती है. ............प्यार है,गुस्सा है ,रूठना-मनाना है ,सुख-दुःख हैं,ख्वाब हैं,हकीकत भी है ...............हम सबके जीवन की किताब के पन्नों पर लिखी कुछ अनछुई इबारतों को पढने और अनकहे पहलुओं को समझने की एक कोशिश है ...............ज़िन्दगीनामा
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Sunday, November 13, 2011
रेलगाड़ी की पटरियां
मेरे शहर के करीब से होकर....
वो तेरा गुज़रना...
रेल से.
तुम्हारा,
मन नहीं हुआ..
कि,मिलते चलो .
सदा ....
ऐसे ही रहेंगे क्या ,हम?
रेलगाड़ी की पटरियों की तरह
साथ चलते हुए भी..
कभी न मिल पाने को ...मजबूर .
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