ज़िन्दगी एक किताब सी है,जिसमें ढेरों किस्से-कहानियां हैं ............. इस किताब के कुछ पन्ने आंसुओं से भीगे हैं तो कुछ में,ख़ुशी मुस्कुराती है. ............प्यार है,गुस्सा है ,रूठना-मनाना है ,सुख-दुःख हैं,ख्वाब हैं,हकीकत भी है ...............हम सबके जीवन की किताब के पन्नों पर लिखी कुछ अनछुई इबारतों को पढने और अनकहे पहलुओं को समझने की एक कोशिश है ...............ज़िन्दगीनामा
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Thursday, October 27, 2011
रूटीन
वही सुबह,वही रातें...
वही दोपहर ,वही शामें....
कुछ भी अलग नहीं...
जीवन के ये दिन......
बस यूँ ही....
बीतते जाते हैं.
बोझल बातें हैं....
बेबस सांसें हैं .....
रुकी-रुकी धडकनें....
थमी-थमी मुस्कुराहटें....
"तुम" आ जाओ ,न ........
तुम्हारी बातों का इन्द्रधनुष
मेरी बेरंग जिंदगी में रंग भरता है .
तेरा हर बात पे कहना ,"पता नहीं "..."कुछ नहीं "
नीरस जीवन में जैसे रस भरता है .
आओ, कि..कुछ तो हो...
रूटीन से हट कर .
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