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Sunday, December 25, 2011

यू एस पी


तुम और मैं
दो विपरीत व्यक्तित्व
तब भी चुम्बक की तरह
एक दूजे की ओर खिंचे चले आये...
क्या सच...विपरीतता ही आकर्षण का कारण बनी
या
मेरी जो कमियां हैं वो तुम पूरी कर देते हो
और तुम्हारा अधूरापन मैं भर देती हूँ ..
एक दूसरे के पूरक हो गए हैं हम.

एक दूजे को ... संपूर्ण कर देना ही ..
हमारे इस रिश्ते की यू एस पी है ..है न?!!

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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