ज़िन्दगी एक किताब सी है,जिसमें ढेरों किस्से-कहानियां हैं ............. इस किताब के कुछ पन्ने आंसुओं से भीगे हैं तो कुछ में,ख़ुशी मुस्कुराती है. ............प्यार है,गुस्सा है ,रूठना-मनाना है ,सुख-दुःख हैं,ख्वाब हैं,हकीकत भी है ...............हम सबके जीवन की किताब के पन्नों पर लिखी कुछ अनछुई इबारतों को पढने और अनकहे पहलुओं को समझने की एक कोशिश है ...............ज़िन्दगीनामा
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Saturday, September 3, 2011
नींद
क्या याद है ...वो अपना बचपन
जब माँ सोती थी ,दोपहर में
तो,जबरन लिटा लेती थी पास में .
वो तो सो जाती थी
पर,जागते रहते थे भाई...मैं और तुम .
उठते थे चुपचाप,बिना कोई आवाज़
फिर भागना,दौड़ना,झूलना,खेलना
इन सब के आगे भला ...
कैसी नींद ,कौन सा सोना?
बड़े हुए..यौवन की मस्ती छायी,
प्यार ने ली अंगडाई ,
प्यार ने खुद ब खुद आंखों से नींद भगायी ,
दिल चुराया किसी ने साथ नींद भी चुराई .
प्यार का जब उतरा बुखार......
जीवन की दौड़ धूप थी
उस में भागते रहने से
थकान तब लगने लगी .
सोने की चाह जागने लगी
काम करके पैसा कमाने में यूँ डूबे
की याद नहीं............
कब नींद पूरी कर के पलंग से हों उतरे .
फिर आया बुढापा ..
अब समय नहीं कटता है
पैसा भी है ,कोई नींद चुराने वाला भी नहीं
खेलने कूदने का भी ज़माना बचा नहीं
पर..................................
अब नींद आती नहीं
पहले मैं दूर उससे भागी
अब वो पास आती नहीं
अब वो शायद एक बार ही आयेगी
हमेशा के लिए सुला जाने
तब तक .....उसका इंतज़ार ...
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