ज़िन्दगी एक किताब सी है,जिसमें ढेरों किस्से-कहानियां हैं ............. इस किताब के कुछ पन्ने आंसुओं से भीगे हैं तो कुछ में,ख़ुशी मुस्कुराती है. ............प्यार है,गुस्सा है ,रूठना-मनाना है ,सुख-दुःख हैं,ख्वाब हैं,हकीकत भी है ...............हम सबके जीवन की किताब के पन्नों पर लिखी कुछ अनछुई इबारतों को पढने और अनकहे पहलुओं को समझने की एक कोशिश है ...............ज़िन्दगीनामा
Showing posts with label बिंदास. Show all posts
Showing posts with label बिंदास. Show all posts
Wednesday, November 9, 2011
जीना चाहती हूँ
जबसे,
गए हो तुम
बहुत तन्हां हूँ मैं .
अपना अता पता भी मालूम नहीं
खुद की कोई खोज खबर नहीं
आओ............
तो, मैं मिलूं खुद से
तुमसे होकर ही...
मैं खुद तक पहुँच पाती हूँ .
जीवन को बहुत ढो चुकी हूँ ,
अब जीवन को जीना चाहती हूँ ....बिंदास !!
Subscribe to:
Posts (Atom)

