थक गयी हूँ
फासला तय करते -करते
जो आ गया हमारे बीच
एक फैसला करते करते .
ज़िंदगी....इतनी दुश्वार तो कभी न थी
जितना अब हो चली है
बड़े दिनों से
अपनी नज़रों से नज़रें भी मिलती नहीं .
तुम थे तो सब था
अब तेरे बिन कुछ भी नहीं
मेरा अपना वजूद ही नहीं
मेरा आप मुझसे सवाल करता है
एक नहीं कई बार करता है
कहाँ गया,क्यूँ गया वो ...
जो था मेरा ...सप्पोर्ट सिस्टम .
