ज़िन्दगी एक किताब सी है,जिसमें ढेरों किस्से-कहानियां हैं ............. इस किताब के कुछ पन्ने आंसुओं से भीगे हैं तो कुछ में,ख़ुशी मुस्कुराती है. ............प्यार है,गुस्सा है ,रूठना-मनाना है ,सुख-दुःख हैं,ख्वाब हैं,हकीकत भी है ...............हम सबके जीवन की किताब के पन्नों पर लिखी कुछ अनछुई इबारतों को पढने और अनकहे पहलुओं को समझने की एक कोशिश है ...............ज़िन्दगीनामा
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Tuesday, September 6, 2011
मैं यह नहीं जानती.....
मैं यह नहीं जानती.....
तुम्हें,कैसा लगता है,मुझसे मिलकर
पर,मैं जब भी तुमसे मिलती हूँ
पास बैठ के बतियाती हूँ
ये वक़्त.....
बादल बन के जैसे उड़ने लगता है
....पानी की तरह बहता जाता है
पारे की बूंदों की तरह फिसलता जाता है .
लाख कोशिशों के बाद भी पकड़ में नहीं आता है .
और आते ही ...न जाने कब
तुम्हारे जाने का वक़्त हो आता है .
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