ग़मों से दोस्ती का मैं दम रखती हूँ
राहे इश्क में पहला क़दम रखती हूँ
खुदा की नेमत सी लगे है ये दुनिया
यही सोचकर शिकायत कम रखती हूँ
बिछड के सूख न जाए प्यार की बेल
आज तलक तेरी यादें नम रखती हूँ
किसी एक दिन तुम हो जाओगे मेरे
दिल के कोने में ये भरम रखती हूँ
लोगों को चाहिए मौक़ा हँसने का
इसी से छिपा के अपने गम रखती हूँ"
