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Sunday, April 14, 2013

अपाहिज

.

आजकल सब अधूरा सा क्यूँ है ?
दिल दर्द से भरा पूरा सा क्यूँ है
बड़ी अजीब से हैं दिन और रात
अनमने से सारे जज़्बात
क्यूँ किसी काम में मन नहीं लगता
क्यूँ यह जीना जीने सा नहीं लगता .
तेरे बिन.

सोचती रहती हूँ कारण....
शायद,
तुझसे बात नहीं होती
मुलाक़ात नहीं होती
इसलिए जी बेज़ार है .
मान ही लूँ कि अधूरी हूँ
तेरे बिन.

बस ख़्याल पूरे हैं
बाक़ी सब अधूरा
मेरा दिल ...मेरी धडकन
मेरा जी ......मेरी जान
सब कुछ अपाहिज सा
तेरे बिन .

Sunday, October 14, 2012

होता है न,यूँ...



जब तक हम तुम
एक दूसरे में गुम
एक दूसरे को खोजते रहे
रिश्ते को जीते रहे

जैसे ही मान लिया
कि
एक दूसरे को जान लिया
खतम होने लगा वो नयापन
शब्दों को ढूँढने लगे
बातों में ढलने लगे

अभी तक जिस रिश्ते में लफ़्ज़ों की ज़रूरत नहीं थी
अनकहा पढ़ने की सुन लेने की आदत हो गयी थी
धडकनों को सुन ,आँखों को पढ़ सब जान लेते थे
कुछ भी हुआ हो सारी सच्चाई पहचान लेते थे
अब......
लफ़्ज़ों की दरकार हुई
सारी मेहनत बेकार हुई
उसी ढर्रे पे चल पड़े
अजनबी से हो चले.

Thursday, January 19, 2012

सांस और धडकन की तरह

तुम कहते हो मेरे बिना  कैसे रहोगे?
मानो न मेरी बात
रह लोगे..मेरी जान.
पता है,मुझे ...
हर कोई रह लेता है
हर किसी के बगैर .

मेरी बातें,वो मुलाकातें
होंगे तेरे साथ...दिन -रात.
बताओ न,फिर कैसे अकेले होगे तुम?

मैंने,इतना तो इंतजाम कर दिया है
कि
ताउम्र....
मेरी यादें,प्यार की वो सौगातें
तेरा पीछा कभी नहीं छोडेंगी .

तुम कहीं भी रहो,किसी हाल में रहो
मैं साथ रहूँगी तेरे
सांस और धडकन की तरह .
जो हमारे अन्दर ही रहते हैं .
पर, यूँ कि एहसास नहीं होता
उनके होने का .

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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