किसी ने कहा ..
कि,
एक कोशिश करके देखूं .
उसे इतना न चाहूँ ...
कि ,
जुड़ाव के कारण
मुझे कोई तकलीफ हो.
जितना गहरा उतरूंगी
बाहर आना उतना मुश्किल हो जाएगा .
शुरुआत है
अभी ही रोक लूँ ..खुद को
क्या करूँ...?
मान लूँ ..?
पर,
ऐसा... होगा कैसे
वो भी...मुझसे
सोचती हूँ, कि प्रेम है...रहेगा
कैसे रोकूँ खुद को..??
चलो,ये कर लेती हूँ..
कि प्यार करती हूँ ...करती रहूंगी,सदा
बस,आज के बाद ..
जतलाना बंद कर दूंगी,तुम्हें .
मैं भी देखूं जो प्यार करते हैं पर जताते नहीं
किसी को चाह के भी कभी जो कह पाते नहीं
दूसरे लफ्जों में कहूँ तो जो तुमसे होते हैं
प्यार होता है फिर भी स्वीकार पाते नहीं
वो कैसे जीते हैं
उन्हें कैसा लगता है
दुआ करना मेरी इस कोशिश के सफल होने की
शायद..इस बदौलत
मैं जान पाऊं वो वजह, तुम्हारी ..
जुड के भी मुझसे दूरी बनाए रखने की
ज़िन्दगी एक किताब सी है,जिसमें ढेरों किस्से-कहानियां हैं ............. इस किताब के कुछ पन्ने आंसुओं से भीगे हैं तो कुछ में,ख़ुशी मुस्कुराती है. ............प्यार है,गुस्सा है ,रूठना-मनाना है ,सुख-दुःख हैं,ख्वाब हैं,हकीकत भी है ...............हम सबके जीवन की किताब के पन्नों पर लिखी कुछ अनछुई इबारतों को पढने और अनकहे पहलुओं को समझने की एक कोशिश है ...............ज़िन्दगीनामा
Showing posts with label जताना. Show all posts
Showing posts with label जताना. Show all posts
Thursday, October 20, 2011
Subscribe to:
Posts (Atom)

