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Thursday, February 21, 2013

खारापन



ज़िंदगी में से मिठास कहीं खो गयी है
हर ओर बस..तल्खियां ही तल्खियां हैं
तेरी-मेरी कुछ मजबूरियां है ...
साथ रहती केवल तनहाईयाँ हैं

गुज़रना चाहती हूँ ...महसूस करना चाहती हूँ
चखना चाहती हूँ
जीवन का हरेक स्वाद .
पर ...आजकल कोई ज़ायका
समझ में नहीं आता
खारेपन के अलावा .

क्या करूँ ???
तेरी आँख के
उस आंसू का खारापन
जाता ही नहीं ज़ुबां से

Thursday, November 29, 2012

उदासी का जश्न


सरप्लस में है उदासी...
सदाबहार है उदासी ..
बेशरम है उदासी ...
गहरी है उदासी ...
एक बार जो घर कर जाए
आसानी से जाती नहीं उदासी .
छोडती नहीं हाथ कभी
साथ निभाती है उदासी

अब जब जीना इसके साथ
मरना इसके साथ
तो क्यूँ न
उदासी का भी जश्न मना लें
जाम अश्कों के छलका कर
दुःख के चखने के साथ
अपने दिल की कहें-सुनें
कुछ देर तन्हाई में रो गा लें.

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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