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Tuesday, February 28, 2012

केंद्रबिंदु



जब भी उसको याद करती हूँ..
दिल में एक खालीपन
साथ साथ महसूस करती हूँ .
रिक्त सा है ..मर सा गया है कुछ
उसके बगैर .
गले में कुछ अटका सा रहता है
आँखों में दरिया सा भरा रहता है
मुझमें ही ...मुझसे ही..
कोई हर वक्त खफा सा रहता है .
तुम्हारा नाम लिख कर
उसमें जब खो जाती हूँ
तब कहीं जाकर
खुद को खोज पाती हूँ .

कहाँ हो ?कैसे हो?
कब हुए खफा ...क्या हुई खता
मुझे सच कुछ नहीं पता .
कैसे जीती हूँ?क्यूँ जीती हूँ
हरेक आती जाती सांस से पूछती हूँ.


मेरी हर भावना ,हर संवेदना
तुम से शुरू हो तुम तक ही जा पाती है
तुम ही केंद्रबिंदु
तुम ही परिधि भी हो .

प्यार तो दोनों को हुआ था ...
पर मैं अकेली क्यों हूँ ,
सच कहना
तुम्हें भी ऐसा ही सा कुछ होता है क्या,कभी?

Thursday, September 1, 2011

तुमसे मेरा क्या नाता है...


तुमसे मेरा क्या नाता है या तुम मेरे क्या लगते हो
जब,किसी दिन कोई मुझसे ये प्रश्न कर लेता है
तब.............
उसके बाद के मेरे कई दिन
इसी सोच में बीत जाते हैं की आखिर तुम कौन हो मेरे?

तुम कौन हो?
इसको तो मैं स्वयं भी परिभाषित नहीं कर पाती हूँ
तुम्हारे लिए ,
अपने इन भावों को खुद व्याख्यायित नहीं कर पाती हूँ.

मुझे बचाते हो जब खतरों से ..
उस पल संरक्षक से लगते हो,तुम
बताते हो जब आगे बढ़ने का सही मार्ग मुझे ..
तब एक सहृदय शिक्षक से लगते हो ,तुम .
जी नहीं पाती तुम पास नहीं होते हो,जब...
तब अपने जीवन से लगते हो ,तुम .
तुम्हें रूठा जान जब दिल डूबता है मेरा ..
उस क्षण दिल की धड़कन से लगते हो ,तुम .
तुम्हारी सौम्य छवि को देखती हूँ जब ...
तो,एक संपूर्ण दर्शन से लगते हो,तुम .
साथ मेरे बांटते हो मेरी खुशियाँ और ग़म
उस समय सच्चे सखा से लगते हो,तुम .
तारीफ़ करते हो जब भी कभी मेरी ..
उस वक़्त काबिल कद्रदां से लगते हो,तुम.
मुझे ,तुम कभी संरक्षक,कभी सहचर कभी सजन से लगते हो
कभी रक्षक,कभी हमसफ़र,अपने जीवन से लगते हो,तुम ..

हरेक परिस्थिति में कुछ नए से लगते हो
हर बार एक नयी तरह से परिचय देते हो
और मैं दुविधा में फंस जाती हूँ
कि
इन सब में से तुम्हें क्या संबोधन दूं
तुम्हारा मेरा रिश्ता क्या है ??
तेरे मेरे बीच कौन सा नाता है
इसके लिए बस यही उत्तर दिमाग में आता है
कि तुम मेरे लिए,मेरे इस जीवन के लिए .........
...सब कुछ हो.
मेरे केंद्र बिंदु,मेरी परिधि हो तुम .
तुमसे शुरू हो कर ज़िंदगी जहां खत्म
होती है वो मेरी एक आरज़ू हो तुम

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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