ज़रूरी यह नहीं
कि प्रेम कितनी बार हुआ
एक बार हुआ या कई बार
ज़रूरी यह है कि
जब हुआ ..जिससे हुआ
उस वक्त
हम उसके साथ
पूरी तरह से थे या नहीं .
उन पलों में जब थे साथ
तब जिए पूर्ण ईमानदारी से
मन-तन सब रहा उसके साथ
यूँ भी...रिश्ता कोई भी हो
किसी से भी हो,कभी भी हो
उसमें शिद्दत की...
ईमानदारी की दरकार
होती है और होनी भी चाहिए
