Sunday, March 27, 2011

मिलन के बाद तुम्हारी जुदाई...............

मिलन के बाद तुम्हारी जुदाई...............
जैसे ,
जलती हुई आग पर एकाएक  पानी पड़ जाना
मद्धम-मद्धम बहती हवा का एकदम से रुक जाना
हँसते-हँसते अश्कों का बेबात छलक   जाना
चमकते सूरज के आगे बदली का छा जाना
सुरीले गीत का एक ही पल में बेसुरा हो जाना
सुबह का कोई हसीं सपना अधूरा रह जाना
किसी कश्ती का किनारे पे आकर डूब जाना

Friday, March 18, 2011

पेंचकस

बाज़ार में,
अचानक .....
बरसों के बाद,
तुम्हारा दिखना .................
एक पेंचकस की तरह 
मेरे दिल में लगे उस प्यार के पेंच को 
गहरे तक कस गया ..........
और, मैं..............
कसमसा के रह गयी 

Wednesday, March 16, 2011

तुम्हारी............


तुम्हारी  चुप्पी .....जैसे  दिल  की  धड़कन  रुक  सी  गयी  हो
तुम्हारी  बेरुखी .......जैसे  सूरज  को  ग्रहण  लग  गया  हो .
तुम्हारी  नाराजगी .........जैसे  मुँह कसैला  सा  हो  जाए .
तुम्हारी  याद ............एक  एहसास  की  सब  कुछ  ठीक  है .

तुम ......

जिस  सोच  में  मैं  हूँ  डूबी  हुई ,
उस  चिंता  का  एकमात्र  चिंतन  हो  तुम .
जिससे  सदा  से  मैं  हूँ  बंधी  हुई ,
हाँ ,वही ,मेरा  बंधन  हो  तुम .
तुम्हारी  जुदाई  भी  है  मैंने  सही ,
इस  पीड़ाकुल मन  का  क्रंदन  हो  तुम .
तुम्हे  देख  कर  नज़रें  तुम  पर  ठहर  गयी ,
आँखों  से  भेजा  मूक  आमंत्रण  हो  तुम .
प्यार  की  परिभाषा   मैंने  तुमसे  जानी ,
प्रेम  का  पूर्ण  आलिंगन  हो  तुम .
भावनाएं  जो  मेरे  इस  दिल  में  उपजी ,
उन  भावनाओं  का  स्पंदन  हो  तुम .
तुम्हें  देख  कर  जो  बढ़  गयी ,
हाँ  ,वही  दिल  की  धड़कन  हो  तुम .
जिसके  सहारे  मैं  ये  भव-सागर  पार  करूंगी ,
मेरे  वही  अवलंबन  हो  तुम .

Sunday, March 6, 2011

सूनापन ..............

मेरा सूनापन ..............
तुम्हारा  सूनापन ...............
चलो ,
गणित  के  किसी  सवाल  के  जैसे
समान  चीज़  को  काट  दें
और  शुन्य  कर  लें .
मेरा  ,तुम्हारा  सूनापन
आपस  में  कट  जाएँ
और  हो  जाएँ  ख़तम
फिर  हमारे  प्यार  की  पूर्णता  में  से  पूर्ण  निकले  भी  तो .......
शेष  रह  जाए
केवल  प्यार  और  अपनापन

Saturday, March 5, 2011

तुम्हारे वादे

तुम्हारे वादे,तुम्हारी कसमें
झूठ या कह लो सच का छलावा
एक पल हैं तो दूजे पल नहीं
जैसे................
जाते हुए वक़्त की पुकार
सावन के महीने में बादल का आकार
पानी पर खिंची रेखा
क्षितिज पर फैला धोखा
धूप  निकलने पर ओस की बूँद
जंगल में फैली अनसुनी गूँज
या कच्ची नींद का सपना
झूठा होकर भी लगे अपना

Wednesday, March 2, 2011

अलग होना

नाखून या रिश्ता सड़ रहे हों
तो,अलग होना पीड़ादायक नहीं होता
पर सांस ले रहे रिश्ते
या जुड़े हुए नाखून को
यूँ खींच कर अलग करना
बहुत तकलीफदेह होता है
बहुत पीड़ादायक...............
तुम खुद मुझे छोड़ते या मैं तुम्हें
तो मुझे दुःख नहीं होता
पर,तुम्हें जबरन मेरी ज़िन्दगी से निकाला गया
इस बात ने मुझे अन्दर तक
हिला कर रख दिया है
दर्द हुआ है मुझे बिलकुल वैसा
किसी का नाखून खींच कर
उसकी खाल से अलग कर दिया जाए जैसा

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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